'जाके प्रिय न राम- बैदेही ।
सो नर तजिय कोटि बैरी सम जद्यपि परम सनेहीI।'
कहाँ से उद्धृत है?
1
तुलसीदास की 'कवितावली' से
2
तुलसीदास की 'विनय पत्रिका' से
3
चतुर्भुज दास के 'भक्ति प्रताप' से
4
नंददास की 'रासपंचाध्यायी' से
'जाके प्रिय न राम- बैदेही ।
सो नर तजिय कोटि बैरी सम जद्यपि परम सनेहीI।'
कहाँ से उद्धृत है?