निम्नलिखित पंक्तियाँ किस नाटक की हैं?

"सब कुछ बह गया

मेरे अपने वैयक्तिक मूल्य

मेरी निश्चिंत किंतु ज्ञान हीन आस्थाएँ। "

1
चंद्रगुप्त
2
महाभोज
3
आगरा बाज़ार
4
अंधायुग

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