प्रताप साहि के बारे में रामचंद्र शुक्ल का कथन नहीं है-:

1
इन्होंने लक्षणा व्यंजन के उदाहरणों की पुस्तक 'व्यंग्यार्थ कौमुदी' के नाम से रची।
2
इनकी प्रतिभा ने पद्माकर की प्रतिभा के साथ रीतिबद्ध काव्य कला को पूर्णता पर पहुँचा कर छोड़ दिया।
3
आचार्य और कवित्व की दृष्टि से ये मतिराम, श्रीपति और दास से कुछ बीस ही ठहरते हैं।
4
अनुप्रास की दीर्घ श्रृंखला अधिकतर इनके वर्णनात्मक पदों में पाई जाती है।

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