'जदपि सुजाति सुलच्छनी, सुबरन सरल सुवृत्त ।
भूषण बिनु न विराजई, कविता वनिता मित्त ।'
यह पंक्ति किस रचनाकार की है?
1
तुलसीदास
2
केशवदास
3
जायसी
4
घनानंद
'जदपि सुजाति सुलच्छनी, सुबरन सरल सुवृत्त ।
भूषण बिनु न विराजई, कविता वनिता मित्त ।'
यह पंक्ति किस रचनाकार की है?