निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही / सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए
सैकड़ों सालों से सिंध के रेगिस्तान में ईंटों का एक बड़ा-सा ढेर लगा हुआ था। आज यह जगह पाकिस्तान में है। वहाँ के लोग इसे मोहनजोदड़ो बोलते थे। यानी मरे हुओं का टीला। तब किसे पता था कि कभी यहाँ भारत की सबसे पुरानी सभ्यता बसती थी । लोगों ने इन ईंटों से अपने घर बनाए। उन्नीसवीं सदी में रेलवे लाइन बनाने के लिए दो अंग्रेज़ इंजीनियर इन ईंटों को भर-भरकर ले गए। जल्द ही इन 4000 साल पुरानी ईंटों पर लाहौर से कराची जाने वाली रेलगाड़ियाँ दौड़ने लगीं। सिंधु घाटी सभ्यता के शहरों की खोज से भारत का इतिहास 2000 सालों से ज़्यादा पीछे चला गया। खुदाई में मिले इन शहरों को देखकर हैरानी हुई कि सभी शहर बिलकुल एक जैसे दिखते थे। प्रमुख सड़कें सीधी बनी थीं। सभी घरों के डिज़ाइन एक जैसे थे। बीच में खुला आँगन और उसके चारों ओर कमरे । शहर के एक सिरे पर एक चारदीवारी थी जिसमें शायद राजा रहता था। इतिहासकार इसे 'सिटाडेल' कहते हैं। सभी घरों की ईंटों का साइज़ बराबर था 7 × 14 x 28 से.मी.। सभी शहरों की दीवारों की ईंटों का साइज़ 10 × 20 × 40 से.मी. था। शहर एक-दूसरे से सैकड़ों किलोमीटर दूर बसे थे । यहाँ नालियों की बढ़िया व्यवस्था थी।