Comprehension Passage

एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश के आधार पर पाँच प्रश्न दिए गए हैं। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्पो में से सही विकल्प चुने।

'श्रम' आदर्श जीवन का मूल मंत्र है। हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा प्रणीत वेद-शास्त्रों में श्रम के महत्व को स्वीकार किया है। श्रमशील महापुरूष का अमृत स्पर्श-छोटे-से-छोटे कार्य को बड़ा बना देता है। सृष्टि के प्रारंभ से लेकर आज तक मानव ने निरंतर परिश्रम करके ही अपने विकास का पथ प्रशस्त किया है। आज संसार में जो कुछ भी दिखाई दे रहा है, वह सतत परिश्रम का फल है। संसार के जितने भी उन्‍नत और समृद्धशाली देश है, उन सबके पीछे परिश्रम का ही आधार है। द्वितीय विश्व युद्ध ने जापान को लगभग तहस-नहस कर दिया था। उसके दो बड़े औद्योगिक नगर हिरोशिमा और नागासाकी अणु

मार से खंडहर मात्र रह गये थे, पर आज जापान विश्व का सबसे अधिक संपन्न देश है क्यों? इसका सिर्फ एक उत्तर है सतत्‌ परिश्रम और प्रयास। संसार के महान से महान व्यक्ति ने अपना जीवन बहुत छोटे रूप से शुरू किया है, लेकिन जीवन भर अनथक परिश्रम कर वे उन्‍नति के चरम शिखर पर पहुँच गए। सत्य तो यह है कि संसार के बड़े और महान लोगों ने जीवन में छोटे से-छोटा समझा जाने वाला कार्य भी पूरी लगन और श्रद्धा से किया किया है। बोझ ढोने वाला कुली तनजिंग ही संसार की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट पर विजय पताका फेहरा सकता है। सुभाषचन्द्र बोस, अब्राहिम लिंकन, लेनिन, गांधी और संसार के असंख्य लोग निरंतर श्रम करके ही कहीं पहुँच सके हैं। किसी लेखक ने कहा है “यदि तुममें उद्धयोगी बनने की क्षमता है तो अपनी सारी शक्तियों को केन्द्रित कर अपने उद्देश्य की पूर्ति में निरत हो जाओ, बाधाओं और विरोधों से भयभीत मत रहो सफलता तुम्हारे चरण चूमेगी”।

‘आधार’ शब्द में प्रयुक्त ‘आ’ व्याकरणि कोटि है:

1
उपसर्ग
2
प्रत्यय
3
पर्यावाची
4
कारक चिन्ह

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