निर्देश: अनुशासनहीनता के अनेक कारण हैं। इन कारणों पर विचार कर उन्हें दूर करने का प्रयत्न किया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में अनुशासित जीवन जीने की कला का विकास हो। कई छात्र वैयक्तिक कारणों से अनुशासनहीनता का शिकार हो जाते हैं। ऐसे छात्र दिशाहीन जीवन जीते हैं। वे न तो समय पर अपना गृहकार्य करते हैं और न ही कार्य विशेष में उनकी रुचि होती है। इससे वे अन्य छात्रों से पिछड़ जाते हैं और कई बार अनुशासनहीन कार्यों में लिप्त हो आत्महीनता का परिचय देते हैं।
पारिवारिक वातावरण तथा परिस्थितियाँ भी अनुशासनहीनता का कारण बन जाती हैं। माता-पिता का अनुचित दबाव, बाल मनोविज्ञान के प्रति उदासीनता आदि से भी छात्रों में अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिलता है। आर्थिक, सामाजिक तथा राजनैतिक कारणों से भी छात्रों में अनुशासनहीनता को गति मिलती है। वर्तमान शिक्षा पद्धति भी छात्रों में अनुशासनहीनता के लिए कुछ हद तक दोषी है, क्योंकि इसमें छात्रों की व्यक्तिगत रुचि को नज़रअंदाज कर दिया जाता है और परीक्षाओं तथा उनमें प्राप्त अंकों को विशेष महत्त्व दिया जाता है।
इससे कई छात्रों की प्रतिभा दबकर रह जाती है। कई बार बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर भी छात्र अपनी इच्छानुरूप संस्थाओं में प्रवेश नहीं ले पाते और कम प्रतिभावान तथा कम अंक प्राप्त छात्र कई अन्य कारणों से प्रवेश प्राप्त कर लेते हैं। भाई-भतीजावाद, बेरोजगारी एवं भविष्य के प्रति अनास्था भी अनुशासनहीनता का कारण बन जाते हैं।