"निर्गुणपंथ के संतों के संबंध में यह अच्छी तरह समझ रखना चाहिए कि उनमें कोई दार्शनिक व्यवस्था दिखाने का प्रयत्न व्यर्थ है। उनपर द्वैत, अद्वैत, विशिष्टाद्वैत आदि का आरोप करके वर्गीकरण करना दार्शनिक पद्धति की अनभिज्ञता प्रकट करेगा।"

उपर्युक्त कथन किस विद्वान का है?

1
डॉ. नगेन्द्र 
2
रामस्वरुप चतुर्वेदी 
3
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी 
4
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल 

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