'राम की शक्तिपूजा' कविता की पंक्तियाँ नहीं है-

1
है अमानिशा, उगलता गगन घन अंधकार।  
2
टूटा वह तार ध्यान का, स्थिर मन हुआ विकल। 
3
वे शर हो गये आज रण में, श्रीहत खंडित। 
4
सतत रथ के चक्रों के साथ!

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation