'ब्रह्मराक्षस' कविता की पंक्तियाँ है-
A. उसकी वेदना का स्त्रोत संगत पूर्ण निष्कर्षों तलक पहुँचा सकूँ।
B. पिस गया वह भीतरी औ' बाहरी दो कठिन पाटों बीच।
C. बावड़ी की इन मुंडेरों पर, मनोहर हरी कुहनी टेक सुनते हैं।
D. बावड़ी को घेर डालें खूब फुली है।
E. शहर के बाए ओर खंडहर की तरफ परित्यक्त सुनी बावड़ी।
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केवल A, B और C
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केवल B, C और D
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केवल B, D और E
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केवल A, C और E