"यथार्थवाद हमको निराशावादी बना देता है, मानव-चरित्र पर से हमारा विश्वास उठ जाता है, हमको चारों तरफ बुराई-ही-बुराई नजर आने लगती है।"- यह कथन किसका है?

1
प्रेमचंद 
2
रामचन्द्र शुक्ल 
3
डॉ. नगेंद्र 
4
हजारीप्रसाद द्विवेदी 

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