'साकेत' और 'यशोधरा' प्रबंधकाव्यों में 'काव्यत्व का तो पूरा विकास' है, लेकिन 'प्रबंधत्व की कमी' है - यह कथन है :

1
महावीरप्रसाद द्विवेदी
2
रामचन्द्र शुक्ल
3
नंददुलारे वाजपेयी
4
नगेन्द्र

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