कुछ नाही का नाँव धरि भरमा सब संसार।

साँच झूठ समझे नहीं, ना कुछ किया विचार।।

उपर्युक्त दोहा किस कवि का हैं ?

1
कबीरदास  
2
रहीम  
3
जायसी 
4
दादूदयाल   

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