"छायावाद' के बंधे घेरे से निकलकर पंतजी ने जगत की विस्तृत अर्थभूमि पर स्वाभाविक स्वच्छन्दता बाद के साथ विचरने का साहस दिखाया है।... पंतजी को 'छायावाद' और 'रहस्यवाद' से निकालकर स्वभाविक स्वच्छंदतावाद (ट्रू रोमांटिसिज्म) की ओर बढ़ते देख हमें अवश्य संतोष होता है।"- यह कथन किसका है?

1
बच्चन सिंह 
2
डॉ. नगेन्द्र 
3
रामचन्द्र शुक्ल 
4
महावीरप्रसाद द्विवेदी

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