"हाँ, यहाँ मैं यात्रान्त पर खड़ा हो कर निहारता हूँ कि यात्रा कहाँ से आरंभ होती है, और गुरल कांकड़ की ही तरह पैर साथता हुआ फिर चल पड़ता हूँ- क्योंकि डगर जहाँ चुकती है, यात्रा वहाँ आरंभ होती है।"

उपर्युक्त कथन किस रचना का है?

1
अरे यायावर याद रहेगा 
2
एक बूँद सहसा उछली 
3
मेरी तिब्बत यात्रा 
4
एक साहित्यिक की डायरी 

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation