"काव्यगत पात्रों का अपना विशिष्ट संदर्भ(ऐतिहासिकता) त्याग कर सामान्य मानव-मात्र हो जाने से वे सहृदय का आलंबन बन जाते है।"
उपर्युक्त मान्यता किस विद्वान की है?
1
अभिनवगुप्त
2
धनिक
3
धनंजय
4
विश्वनाथ
"काव्यगत पात्रों का अपना विशिष्ट संदर्भ(ऐतिहासिकता) त्याग कर सामान्य मानव-मात्र हो जाने से वे सहृदय का आलंबन बन जाते है।"
उपर्युक्त मान्यता किस विद्वान की है?