"निराशावाद के भीतर आशावाद का संदेश देना - संसार की क्षणिकता में उसके वैचित्य का इन्द्रधनुषी चित्र खींचना इन सिद्धों की कविता का गुण था ।" यह कथन किस विद्वान का है ?

1
पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी
2
डॉ. रामकुमार वर्मा
3
डॉ. गणपति चन्द्र गुप्त
4
डॉ. नगेन्द्र

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