प्रोषित-पतिकाएँ हों, जितनी भी सखि, उन्हें निमंत्रण दे आ।

साकेत के नवम सर्ग की इन पंक्तियों के संदर्भ में कौन-सा कथन संगत है?

1
उर्मिला अपना अकेलापन दूर करना चाहती है।
2
राजमहल के वैभव से प्रोषित-पतिकाओं को परिचित कराना चाहती है।
3
दुखी जन ही उर्मिला को सुख दे सकत़े हैं।
4
उर्मिला समाजसेवा के यज्ञ में प्रोषित-पतिकाओं को सम्मिलित करना चाहती है।

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