"ऐसे ही होते हैं डॉक्टर, सरकारी अस्पताल है न, क्या परवाह है। मैं तो रोज ही ऐसी बातें सुनती हूँ। अब कोई मर-मुर जाएँ तो खयाल ही नहीं आता। पहले तो रात-रात भर नींद नहीं आया करती थी।" प्रस्तुत अंश किसने किससे कहा है?
1
चंपा ने बुधगुप्त से
2
नरेंद्र ने किरन से
3
मालती ने महेश्वर से
4
वंशीधर ने जानकी से