"किसी अलक्ष्य महाकवि के प्रथम जागरण-छंद के समान पक्षियों का कलरव नींद की निस्तब्धता पर फैल रहा है। रात की गहरी निस्पंद नींद से जागे हुये वृक्षों में दीर्घ निःश्वास के समान समीर बह रहा है। और ऐसे समय में मेरी स्मृति ने मुझे भी किसी अतीतकाल के प्रभाव में जगा दिया है। जान पड़ता है ठकुरी बाबा गंगा तट पर बैठकर तन्मय भाव से प्रभाती गा रहे हैं- जागिए कृपानिधान पंछी बन बोले।”

उपर्युक्त दी गई पंक्तियाँ किस रचना से संबंधित है?

1
माटी की मूरतें 
2
मुर्दहिया
3
ठकुरी बाबा 
4
प्रेमचंद घर में 

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