'कलगी बाजरे की' की कविता की पंक्तियों को पहले से बाद के क्रम में लगाएं-
A. हरी बिछली घास। दोलती कलगी छरहरे बाजरे की।
B. नहीं, कारण कि मेरा हृदय उथला या सूना है या कि मेरा प्यार मैला है
C. कभी बासन अधिक घिसने से मुलम्मा छूट जाता है
D. आज हम शहरातियों को, पालतू मालंच पर सँवरी जुही के फूल-से
E. शब्द जादू हैं- मगर क्या यह समर्पण कुछ नहीं है?
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए-
1
A, C, B, D, E
2
A, B, C, D, E
3
A, D, B, C, E
4
A, B, D, C, E