निम्न में से कौन-सी पंक्ति पुरूरवा द्वारा नहीं कही गई हैं-
1
जब से हम-तुम मिले, रूप के अगम, फुल्ल कानन में...
2
द्वंद्व रंच भर नहीं कहीं भी प्रकृति और ईश्वर में...
3
नर चाहता संदेह खींच रख लेना जिसे हृदय में...
4
जब भी तन की परिधि पारकर मन के उच्च निलय में...