कि आरे ! नव जौवन अभिरामा।
जत देखल तत कहए न पारिअ, छओ अनुपम एक ठामा।।
उक्त काव्य-पंक्तियों में कवि कहना चाहता है कि वह -
1
रूप - वर्णन करने मे संभ्रम की स्थिति में है।
2
आंशिक रूप से रूप- वर्णन करने में समर्थ है।
3
रूप - वर्णन करने में समर्थ है।
4
रूप - वर्णन करने में असमर्थ है।