Teaching UGC NET Mock Test Series 2025 (Paper 1 & 2) हिन्दी साहित्य हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल
"समस्त मानव जीवन के प्रवर्तक भाव या मनोविकार ही होते हैं, मनुष्य की प्रवृत्तियों की तह में अनेक प्रकार के भाव ही प्रेरक के रूप में पाए जाते हैं। शील या चरित्र का मूल भी भावों के विशेष प्रकार के संगठन में ही समझना चाहिए।"
उपर्युक्त पंक्तियाँ किस निबंध से उद्घृत हैं?
1
कविता क्या है
2
भाव या मनोविकार
3
मनुष्य ही साहित्य का लक्ष्य है
4
तुम चन्दन हम पानी