Teaching UGC NET Mock Test Series 2025 (Paper 1 & 2) हिन्दी साहित्य हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल
"अब आप इस बसन्त को ही लो,
यह दिन को ताँत की तरह तानता है
पेड़ों पर लाल - लाल पत्तों के हजारों सुखतल्ले
धूप में, सीझने के लिए
लटकाता है"
उपर्युक्त पंक्तियों से ध्वनित होता है कि:
1
मोचीराम मोची नहीं, शायर है।
2
मोचीराम नये बिंबों और प्रतीकों में बात करता है।
3
मोचीराम बसंत का बयान अपने पेशे की भाषा में करता है।
4
मोचीराम जिंदगी को किताबी ढंग से जीता है।