“अगर प्रेम खूख्वार शेर है तो मैं उससे दूर ही रहूॅँँगी। मैंने तो उसे गाय ही समझ रखा था। मैं प्रेम को सन्देह
के ऊपर समझती हूँ। वह देह की वस्तु नहीं, आत्मा की वस्तु है। सन्देह का वहाँ ज़रा भी स्थान नहीं और
हिंसा तो सन्देह का ही परिणाम है। वह सम्पूर्ण आत्मसमर्पण है।” ये पंक्तियाँ “गोदान” उपन्यास में किस पात्र
द्वारा कही गई हैं?
1
गोविन्दी
2
सोना
3
सीलिया
4
मालती