"जेहि न मित्र, दुख होंहि दुखारी
तिन्हहि विलोकत पातक भारी"
उपर्युक्त चोपाई का सही अर्थ है -
A. जो मित्रों के दुख से दुखी नहीं होता उसे देखना भी पाप है।
B. मित्रों के दुख से दुखी होना उचित होते हुए भी जरूरी नहीं है।
C. मित्रता ऐसी हो जिसमें लाभ - हानि की भावना छिपी हो।
D. मित्रता का निर्वहन न करने वाले को देखना भी पाप है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
1
केवल A और D
2
केवल A और B
3
केवल B और C
4
केवल B और D