अर्ध-मागधी प्राकृत के संबंध में सत्य कथन हैं :

A. जैन आचार्यों ने शास्त्रों की रचना में इस भाषा को अपनाया ।

B. इसका तत्कालीन रूप मथुरा के आसपास व्यवहृत होता था ।

C. 'स', 'ष' के स्थान पर 'श' का प्रयोग अर्धमागधी की प्रमुख विशेषता है।

D. अर्ध-मागधी प्राकृत की स्थिति मागधी और शौरसेनी प्राकृतों के बीच मानी गई है।

E. अर्ध-मागधी प्राकृत के अर्धमागधी अपभ्रंश से अवधी बोली का संबंध माना जाता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

1
केवल A, C और E
2
केवल A, C और D
3
केवल A, B और E
4
केवल A, D और E

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