"यह नाटक इस अर्थ में समकालीन नाटक है कि यह किसी भी समय के अन्याय, अनाचार, भ्रष्टाचार, विवेक-शून्यता और मनमानेपन पर रोशनी डालता है। इस प्रहसन में व्यंग्य के माध्यम से जो कुछ भी कहा गया है, उतना ही अधिक कहने की गुंजाइश भी है। " - 'अंधेर नगरी' नाटक के संबंध में यह कथन किस आलोचक का है ? 

1
परमानंद श्रीवास्तव
2
सत्यप्रकाश मिश्र
3
रामविलास शर्मा
4
रामचंद्र शुक्ल

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