"राजनीति ही मनुष्यों के लिए सब कुछ नहीं है। राजनीति के पीछे नीति से भी हाथ न धो बैठो, जिसका विश्व - मानव के साथ व्यापक सम्बंध है। राजनीति की साधारण छलनाओं से सफलता प्राप्त करके क्षणभर के लिए तुम अपने को चतुर समझने की भूल कर सकते हो।" 'ध्रुवस्वामिनी' नाटक का उक्त संवाद किसके द्वारा कहा गया-
1
मन्दाकिनी
2
ध्रुवस्वामिनी
3
कोमा
4
मिहिरदेव