Teaching UGC NET Mock Test Series 2025 (Paper 1 & 2) हिन्दी साहित्य हिन्दी साहित्य का इतिहास भक्तिकाल
यों ही मन मेरो काम को न रहयो माई,
स्याम रंग हवै करि समान्यो स्याम रंग मैं।
उक्त काव्य-पंक्तियों मे कोई गोपी या भक्त कहना चाहते है-
I. श्रीकृष्ण के रंग में रंगकर मेरा रंग काला हो गया है।
II. मेरा रंग पहले से काला है इसलिए श्रीकृष्ण के रंग में मिल सका।
III. श्रीकृष्ण के रंग में रंग कर मेरा मन उन्ही के जैसा हो गया।
IV. मेरा मन श्रीकृष्ण के वश में हो गया है।
1
III और IV सही
2
II और III सही
3
I और II सही
4
I और IV सही