'कविता करना अनंत पुण्य का फल है। इस दुराशा और अनंत उत्कंठा से कवि जीवन व्यतीत करने की इच्छा हुई । संसार के समस्त अभावों को असंतोष कहकर ह्रदय को धोखा देता रहा। परंतु कैसी विडंबना लक्ष्मी के लालों का भ्रूभंग और क्षोभ की ज्वाला के अतिरिक्त मिला क्या !' - यह कथन 'स्कंदगुप्त' नाटक में किसके द्वारा कहा गया है?

1
मुद्गल 
2
कुमार गुप्त
3
मातृगुप्त 
4
पर्णदत्त

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