‘मानस का हंस' के अनुसार उपन्यास के अंतिम अंश में तुलसीदास 'विनय पत्रिका' के किस छन्द को अन्तिम छन्द कहते हुए उसे गाने लगते हैं ?
1
कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो ।
2
मारुति-मन, रूचि भरत की लखि लषन कही है।
3
जाके प्रिय न राम बैदही
4
जानि पहिचानि मैं बिसारे हौं कृपानिधान