"यह नाटक इस अर्थ में समकालीन नाटक है कि यह किसी भी समय के अन्याय, अनाचार, भ्रष्टाचार, विवेक शून्यता और मनमाने पर रोशनी डालता है। इस प्रहसन में व्यंग्य के माध्यम से जो कुछ भी कहा गया है, उतना ही अधिक कहने की गुंजाइश भी है।" 'अंधेर नगरी' नाटक के सम्बंध में यह कथन किसका है?
1
सत्यप्रकाश मिश्र
2
गिरीश रस्तोगी
3
जयनाथ नलिन
4
दशरथ ओझा