"जो अपने धर्म से हीन पाप ही में गड़े रहते हैं वो माता-पिता की हित की बात को नहीं सुनते, सबसे बैर करते हैं। ऐसे जो पापी जन हैं, सो महाडेरावनी दक्षिण द्वार से जा नरकों में पड़ते हैं। "
यह गद्यखंड खड़ीबोली के किस आरम्भिक गद्यकार का है?
1
इंशाअल्ला खाँ
2
सदासुखलाल नियाज
3
सदलमिश्र
4
लल्लूलाल