"एक रूप हिन्दू तुरुक दूजी दशा न कोय।

मन की द्विविधा मानकर भये एक सों दोय।।"

यह कविता किस कवि की है?

1
नरोत्तम दास
2
वली दक्कनी
3
नवल दास
4
बनारसी दास

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