‘मैं अब परिधियां लांघ सकती थी, सीमाएँ तोड़ सकती थी। दरअसल सीमा में रहना मुझे सदैव कचोटता है, इसलिए सीमा को तोड़ने मात्र का आभास ही मुझे अत्यधिक सुखकारी लगता है।'

उपर्युक्त कथन किस पुस्तक में हैं?

1
जामुन का पेड़
2
आपहुदरी
3
माटी की मूरतें  
4
प्रेमचन्द घर में

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