“मैं मानता हूँ कि आप लोग कुचले हुए और उपेक्षित हैं, लेकिन आपको अपनी इस ताकत का एहसास होना चाहिए कि अगर आप चाहें तो प्रशासन की इस मशीन का चलना असंभव बना दे सकते हैं। यह आप ही लोग तो हैं जो रेलों और तारघरों को चलाते हैं।” यह कथन किस राष्ट्रीय नेता का है?

1
बालगंगाधर तिलक
2
गोपालकृष्ण गोखले
3
अरविन्द घोष
4
बिपिन चंद पाल

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