“यों तो वास्तविक जीवन में भी काफ़ी घूमा-भटका हूं, पर उस से कभी तृप्ति नहीं हुई, हमेशा मन में यही रहा कि कहीं और चलें, कोई नयी जगह देखें और इस लालसा ने अभी भी पीछा नहीं छोड़ा है।”
उपर्युक्त कथन 'अरे यायावर रहेगा याद' रचना के किस शीर्षक से सम्बद्ध है?
1
किरणों की खोज
2
मौत की घाटी में
3
बहता पानी निर्मल
4
माझुली