बिहारी के इस दोहे में नायिका के नैन और चतुराई के माध्यम से प्रेम के जिस भाव को व्यक्त किया गया है, वह क्या दर्शाता है?

अर तैं टरत न बर-परे, दई मरक मनु मैन।

होड़ाहोड़ी बढ़ि चले चितु, चतुराई, नैन।।

1
नायिका की चतुराई प्रेम में छल और कपट को दर्शाती है, जो नायक के मन को भटकाने का प्रयास करती है।
2
नायिका की चतुराई और नैनों का खेल प्रेम में एक रणनीतिक और बौद्धिक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है, जो प्रेम को गहन और गतिशील बनाता है।
3
नायिका के नैन प्रेम में आत्मसमर्पण और भक्ति की भावना को व्यक्त करते हैं, जो नायक को आध्यात्मिक प्रेम की ओर ले जाता है।
4
नायिका का प्रेम केवल शारीरिक आकर्षण तक सीमित है, जो नायक को भौतिक सुख की ओर प्रेरित करता है।

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