रावरे रूप की रीति अनूप, नयो-नयो लागत ज्यौं ज्यौं निहारियै।
त्यौं इन आँखिन बानि अनोखी अघानि कहूँ नहिं आनि तिहारियै।
एक ही जीवन हुतौ सु तौ वार्यौौ सुजान सँकोच और सोच सहारियै।
रोकी रहै न, दहै घनाआनंद बावरी रिझि के हाथन हारियै।।
निम्नलिखित कथनों में से कौन-से काव्य की पंक्तियों के भाव और अर्थ को सही ढंग से व्यक्त करते हैं?
(A) प्रिय के रूप-सौंदर्य को अनुपम और बार-बार देखने पर नया प्रतीत होने वाला वर्णित किया गया है।
(B) वक्ता अपनी आँखों की तुलना बाणों से करता है, जो प्रिय के सौंदर्य को देखकर घायल हो जाती हैं।
(C) प्रेम की अनुभूति को सामाजिक बंधनों और नैतिकता के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
(D) वक्ता प्रिय के प्रति पूर्ण समर्पण और आनंद की अनुभूति को व्यक्त करता है, जो उसे संकोच और सोच से मुक्त करता है।
(E) प्रिय का सौंदर्य केवल शारीरिक है और आध्यात्मिक या दैवीय आयाम से रहित है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए-