"डिंगल कवियों की वीर-गाथाएँ, निर्गुणिया संतों की वाणियाँ, कृष्ण भक्त या रागानुगा भक्तिमार्ग के साधकों के पद, राम-भक्त या वैधी भक्तिमार्ग के उपासकों की कविताएँ, सूफी साधना से पुष्ट मुसलमान कवियों के तथा ऐतिहासिक हिंदी कवियों के रोमांस और रीति काव्य- ये छहों धाराएँ अपभ्रंश कविता का स्वाभाविक विकास है।"
उपर्युक्त कथन किस विद्वान का है?

1
रामचन्द्र शुक्ल 
2
डॉ. नगेन्द्र 
3
हजारीप्रसाद द्विवेदी 
4
रामकुमार वर्मा 

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