"व्यक्ति तो विशेष ही रहता है पर प्रतिष्ठा उसमें ऐसे सामान्य धर्म की रहती है जिसके साक्षात्कार से सब श्रोताओं या पाठकों के मन में एक ही भाव का उदय थोड़ा या बहुत होता है ।" साधारणीकरण के विषय में यह कथन है
1
डॉ. नगेन्द्र
2
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
3
आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी
4
डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी