“प्रेम का नाम न लो ! वह एक पीड़ा थी जो छूट गयी। उसकी कसक भी धीरे-धीरे दूर हो जायेगी। राजा मैं तुम्हें प्यार नहीं करती।"

प्रस्तुत संवाद किस नाटक का है और किसने कहा है?

1
आषाढ़ का एक दिन - मल्लिका ने
2
आगरा बाजार - शोहदा ने
3
एक और द्रोणाचार्य. - अनुराधा ने
4
ध्रुवस्वामिनी – कोमा ने

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