"चंद्रगुप्त" नाटक में निम्नलिखित में से कौन सा उद्धरण चाणक्य का नहीं है?

1
"त्याग और क्षमा, तप व विद्या - तेज व सम्मान के लिये है।"
2
"मैं क्रूर हूँ केवल वर्तमान के लिये, भविष्य के सुख व शांति के लिये।"
3
"अरुण यह मधुमय देश हमारा, जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।"
4
"समझदारी आने पर यौवन चला जाता है।... मैं अविश्वास, कूट चक्र और छलनाओं का कंकाल...."

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