"तो पर वारौं उरबसी, सुनि राधिके सुजान ।

तू मोहन कैं उरबसी है उरबसी - समान ।। "

- में रत्नाकरजी ने 'उरबसी' का क्रमशः अर्थ किया है

1
अप्सरा विशेष, उर में बसी, भूषण विशेष
2
उर में बसी, अप्सरा विशेष, भूषण विशेष
3
भूषण विशेष, उर में बसी, अप्सरा विशेष
4
अप्सरा विशेष, भूषण विशेष, उर में बसी

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