भारतीय संविधान के संशोधन से संबंधित मामलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और सही कथनों का चयन करें।
कथन:
A. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि संविधान के मूल ढांचे को संशोधन द्वारा नहीं बदला जा सकता।
B. गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य मामले (1967) में फैसला दिया गया कि संसद मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है।
C. मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ मामले (1980) में, यह माना गया कि मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक सिद्धांतों के बीच 'सद्भाव और संतुलन' संविधान की मूल संरचना की एक आवश्यक विशेषता है।
D. शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ मामले (1951) में निर्णय दिया गया कि अनुच्छेद 368 संसद को संविधान में संशोधन करने की असीमित शक्ति देता है, और ऐसे संशोधनों पर न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।