सर्वोच्च न्यायालय ने वी.सी. रंगदुराई बनाम डी. गोपालन में फैसला सुनाया कि एक वकील जिसे पेशे से वंचित कर दिया गया है या निलंबित कर दिया गया है, उसे उचित समय बीतने के बाद यह साबित करना होगा कि
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वह अपने कर्तव्य से विचलन की तुच्छता को समझता है
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वह गरीबी और ईमानदारी का लगातार जीवन जीता है
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वह अपने पेशेवर व्यवहार में ईमानदारी और सम्मान की गारंटी देने के लिए आवश्यक अच्छे चरित्र का अधिकारी है
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आवेदक पर यह साबित करने का भार है कि वह बिना किसी प्रतिबंध के कानून का अभ्यास करने के विशेषाधिकार को फिर से शुरू करने का हकदार है।