अभिकथन (A): कोई व्यक्ति जो वैध हिरासत से भागे हुए किसी राजकीय कैदी को शरण देता है, वह भारतीय न्याय संहिता की धारा 158 के अंतर्गत दंडनीय है।
कारण (R): भागे हुए राज्य कैदी को शरण देना या छिपाना, भागने में सहायता करना माना जाता है, जिसके लिए आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि का दंड हो सकता है और इसमें जुर्माना भी शामिल हो सकता है।
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A और R दोनों सत्य हैं, तथा R, A का सही स्पष्टीकरण है।
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A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
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A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
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A असत्य है, लेकिन R सत्य है।