‘दोहरी नागरिकता’ की अवधारणा राष्ट्र-राज्यों के पारंपरिक विचारों को कैसे चुनौती देती है?
1
यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय पहचान और राज्य की सदस्यता हमेशा समान होती है
2
यह सिद्ध करता है कि राजनीतिक वैधता पूरी तरह से जातीय संबंध पर निर्भर करती है
3
यह इस विचार को पुष्ट करता है कि एक राष्ट्र में एकल, एकीकृत राज्य होना चाहिए
4
यह व्यक्तियों को दो अलग-अलग राज्यों से संबंधित होने की अनुमति देता है, जिससे एक-से-एक राष्ट्र-राज्य संबंध कमजोर होता है